गणेश चतुर्थी विशेष –  गणेश उत्सव 2019 पर स्वमानों का अभ्यास,Ganesh chaturthi 2019

GANESH CHATURTHI 2019

गणेश चतुर्थी विशेष –  गणेश उत्सव 2019 पर स्वमानों का अभ्यास

 

सोमवार 2/9/19
 मैं आत्मा सर्व की मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाली मंगल मूर्ती हूँ।

मंगलवार 3/9/19
मैं आत्मा दु:ख हर्ता, सुख कर्ता हूँ।

बुधवार 4/9/19
 मैं आत्मा विघ्न विनाशक गणेश हूँ।

गुरुवार 5/9/19
मैं आत्मा सबकी बातों को समाने वाला लंबोदर गणेश हूँ।

शुक्रवार 6/9/19
मैं दिलाराम बाप से सर्व की दिल जोड़ने वाली दिव्य बुद्धि दाता हूँ।

शनिवार 7/9/19
 मैं आत्मा भक्तों को भक्ति का फल देने वाला शिव पुत्र हूँ।

रविवार 8/9/19
 मैं आत्मा ब्रहस्पति की दशा बिठाने वाला मास्टर ज्ञान सागर हूँ।

 




सोमवार 9/9/19
 मैं श्रीमत पर चल विधि से रिद्धि सिद्धि प्राप्त करने वाली *विजयी रत्न हूँ

मंगलवार 10/9/19
 मैं आत्मा अनेक जन्मों का भाग्य प्रदान करने वाला भाग्य विधाता हूँ।

बुधवार 11/9/19
 २१ जन्मों की बादशाही के लड्डू /मोदक का प्रसाद स्वीकार करने वाली मैं प्राप्ति स्वरूप गणेश मूर्ती हूँ।

गुरुवार 12/9/19
 मैं आत्मा पुरानी दुनिया को विदाई और नई दुनिया की बधाई देने वाली *रूहानी यात्री हूँ*।



 

गणेश चतुर्थी विशेष
यजुर्वेद-23-19
ओ३म् गणानां त्वा गणपतिं हवामहे।
प्रियाणां त्वा प्रियपतिं हवामहे। निधीनां त्वा निधिपतिं हवामहे वसो मम। आहमजानि गर्भधमा त्वमजासि गर्भधम्।।
भावार्थ
हे परमपिता परमात्मा आप समस्त समूहों के राजा हैं हम आपकी प्रजा हैं इसलिए मैं आपको गणपति अर्थात् गणेश नाम से पुकार रहा हूँ आप प्रिय पदार्थों के पति हैं, आप समस्त धन सम्पत्तियों, खजानों आदि के स्वामी हैं, आप मेरे अर्थात् हम सबको वसाने वाले वसु हैं, आप जन्म आदि दोष से रहित हैं, मैं अपनी अविद्या को दूर फेंक दूँ। हे प्रभु मैं समस्त प्रकृति को गर्भ में रखने वाले आप को जान सकूँ। ऐसी आपसे विनम्र प्रार्थना है।
पद्यार्थ
विघ्न हरण मंगल करण,
परमपिता परमेश।
आये हैं हम शरण में,
रक्षा करो हमेश।
हे प्रियपति हे गणपति,
हे भूपति महाराज।
दूर अविद्या दोष कर,
काटो कष्ट क्लेश।
माँग रहे वर विमल हम,
दो सबको वरदान।
प्रीति बढ़ा अपनी तरफ,
वरो करो कल्याण।।
आओ जानें गणेश चतुर्थी
का सच्चा स्वरूप–
विघ्नहर्ता मंगल कर्ता गणेशजी अर्थात् गण-प्रजा जमा ईश- भगवान, गणेश नाम से भगवान को सम्बोधित करना एक नाम यह भी है ईश्वर का जो वेद में गणपति नाम से आया है। वैदिक मन्त्र में आये शब्द भुवः और स्वः जिनका अर्थ भी दुःखनाशक, सुख स्वरूप है। इसे सामान्य भाषा में विघ्नहर्ता, मंगल कर्ता कहते हैं दोनों एक ही बात हैं।
ईश्वर राजाओं का भी राजा अर्थात् महाराज है
चाहे कोई कितना भी शक्तिशाली धनवान ज्ञानवान क्यों न हो सभी उसी से मांगते हैं। क्योंकि वह सबसे बड़ा सर्वश्रेष्ठ महान राजा है। यह हम सभी जानते हैं।
अब चतुर्थी अर्थात् चार ईश्वर की मुख्य बातों की ओर संकेत करती है।

 

1- गणेश प्रतिमा को कलाकार ने अपनी सूक्ष्म बुद्धि द्वारा बड़े ही सुंदर ढंग से चित्रित किया है।
जो राजा अर्थात् ईश्वर के चार महान गुणों की ओर संकेत कर रही है। जिसे हाथी की बनावट से लिया गया है
पहला- कान बड़े
सबकी बात ध्यान से सुनने वाला
दूजा- बड़ा पेट
सबको गर्भ में रख पालन पोषण करने वाला, बड़ा मस्तिष्क- दिमाग से निर्णय इत्यादि
तीजा- आंख छोटी विवेक से भरी
समझदारी, सूझ बूझ की परिचायक
सर्वज्ञता
चौथा-
बढ़ी हुई सूंढ़ हाथी
हाथी जंगल का राजा
उसी तरह परमात्मा समस्त सृष्टि का राजा
हाथी बहुत स्वाभिमानी होता है कभी झुककर नहीं खाता। राजा को भी सभी भोग विलासों से दूर रह प्रजा का पूरा ध्यान रखना चाहिए। ईश्वर समस्त संसार में रहते हुए भी प्रकृति से सर्वथा अलग है। राजा को सर ऊँचा कर सम्मान से जीना चाहिए। ईश्वर सबसे ऊँचा है ही अपने महान गुणों से।
उस महान परमेश्वर के लिए यह तो छोटा मुँह बड़ी बात है। जिस परमेश्वर के अनंत गुण कर्म स्वभाव हैं उसकी कृपा हम सब पर हमेशा बनी रहे। यह आते हुए पर्व हमें प्रभु को अलग अलग रूपों में पुनः पुनः स्मरण कराते हैं।
इसलिए हमें ईश्वर के सच्चे स्वरूप को जान उसकी भक्ति करनी चाहिए

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