चरण कमल दर्शन by light of spiritual

 

चरण कमल दर्शन 

प्रत्येक मनुष्य अपने इष्ट देवी देवता को चरण कमल की वंदना करते हैं और दर्शन करने की प्रथा आदि काल से चली आ रही हैं तीर्थो पर दर्शन करने जाते हैं

मंदिरो में झाँकी के दर्शन, गुरू के दर्शन करते हैं लक्ष्मण जी भी सदैव माता सीता के चरणों के दर्शन किया करते थे

चरणों के दर्शन माना जिस राह पर हमारे आराध्य देव चल रहे हैं उन्हीं के चरण चरणों के सहारे आगे बढते जाना है, अत: महान आत्मा जैसा कार्य करती हैं उसी कर्म को करते आगे जाना तभी हम मोक्ष को प्राप्त कर सकते हैं महान बन सकते हैं चरण स्पर्श करने का तात्पर्य कि परमात्मा के चरण जैसे जैसे बढ़ते है हम उन्हीं चरण कमल की धूल माथे पर लगा कर आगे की राह पकडते हैं

मान्यता हैं कि महान आत्मा के चरण के दर्शन से मानव जीवन तर जाता है

अन्तरात्मा में उनके पद चिन्हो पर गहराई से विचार करना और अनुकरण करना, उनके आचरणों पर स्वयं चलना स्वयं में वैसे आचरण धारण करना, विचार करना कि ये कैसे चलते हैं जीवन में क्या काम किया, हमें भी क्या और कैसे करना है तभी हम भी महानता की ओर अग्रसर होकर अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं

महान आत्माओ के चरण कितने कोमल होते हैं किन्तु वे अमुक रास्ते पर चलते ज़रूर है चाहे वह रास्ता कंकडो, काटो से भरा क्यो न हो । वे व्यवधान व कठिनाइयों की परवाह किए विना चलते जाते हैं और अपने लक्ष्य पर पहुचते हैं ऐसा ही हमें बनना हैं तभी हमारे अंदर वह आचरण आएगें । वही चरण कमल आसन पर विराजमान होगे । देवी देवताओ के चरण की उपमा कमल पुष्प से की जाती हैं क्योंकि वे विना विकर्म किए अपने लक्ष्य को प्राप्त करते हैं ऐसे चरणों के दर्शन कर हम ऐसा जीवन पा सकते हैं कि दूसरो के लिए मिसाल बन सकें पुरूषार्थ करके हम पुरूषार्थी बन सकते हैं

 

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