परमात्मा का नाम, रूप एवं रंग

परमात्मा का नाम, रूप एवं रंग

 

 


परमात्मा पवित्र आत्मा हैं, निराकार हैं, अर्थात परमात्मा को न तो मनुष्य न किसी पशु का शरीर प्राप्त होता हैं । परमात्मा, अदृश्य, चमकदार एवं आनंदमय प्रकाश रूप हैं । परमात्मा को एक अलग सत्ता के रूप में माना जाता हैं जो परमधाम में निवास करते हैं । एवं जो इस भौतिक जगत के सर्व प्रकार के बंधनो से सदा के लिए मुक्त हैं । परमात्मा की अपरिवर्तनशील पूर्णता को इसलिए महत्व दिया जाता है क्योंकि उनकी यह विशेषता ही एकाग्रता एवं स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण अवश्यकता हैं ।

 

 


इसके विपरीत मनुष्य आत्माएं एवं पदार्थमय जगत लगातार गतिशील अवस्था में हैं और उनमें पतन भी होता जा रहा हैं । एक मनुष्य आत्मा, परमात्मा के साथ योग लगा कर अपनी पवित्रता, शांति, आनंद एवं प्रेम की प्रारंभिक ऊँची स्थिति को प्राप्त कर सकता हैं । योग का अर्थ हैं अपने मन को परमात्मा की प्रेमपूर्ण याद में टिका देना । जब आप ऐसी स्थिति प्राप्त कर लेते हैं तब आप खुद को सकारात्मक रूप से इस भौतिक जगत को प्रभावित कर लेते हैं । भौतिक व प्राकृतिक जगत की स्थिति व हालत किसी ऐतिहासिक काल में उस वक्त की मानवता की सूरत को स्पष्ट करता है । वर्तमान समय में, नकारात्मक चिंतन ने अत्यंत मजबूत स्वरूप धारण कर लिया है जिसके परिणाम स्वरूप नकारात्मक कार्यकलाप बड़े पैमाने पर जारी हैं और जिससे भौतिक, भावनात्मक एवं मनोवैज्ञानिक पीड़ाओ ने विकराल रूप ले लिया है ।

 

 


सभी धर्मो के लोग परमात्मा को प्रेम, शांति, दया, करूणा का सागर कहते हैं । परमात्मा को सभी चीजों का निर्माता, पालनकर्ता, सर्वशक्तिमान, अपरिवर्तनीय, सर्वज्ञ कहा जाता हैं ।

 

 


निराकारी परमात्मा के लिए अनेक नामो का प्रयोग किया जाता हैं । उनमें से कुछ ईश्वर, प्रभु, लार्ड, जेहोवा, याहोवा, अहूरा, मजदा एवं ओम् हैं । हर एक नाम का अपना खास अर्थ हैं, जो परमात्मा के किसी खास पहलू का घोतक हैं ।

ब्रह्माकुमारियां परमात्मा के लिए शिव नाम का प्रयोग करती हैं ,जो सभी आत्माओं के पिता हैं । शिव का अर्थ है – कल्याणकारी ।
सदा शिव का अर्थ हैं शाशवत ।

 

 


जब हम परमात्मा को अपने माता-पिता के रूप मे याद करते हैं तब यह रिश्ता हमें निमंत्रण देता है कि हम इस दुनियां मे आए एवं परमात्मा से ज्ञान, शांति एवं आनंद सहित हर प्रकार के गुण एवं संपत्ति उत्तराधिकार के रूप में प्राप्त करें । परमात्मा के साथ रिश्ता जोड़ने का अर्थ हैं अपने विचारों को उनके साथ जोड़ना, स्वयं को उनके नजदीक पाना, उनसे दिशानिर्देश पाना एवं खुद को सुरक्षित महसूस करना । परमात्मा महान है। उनके गुणों को धारण करना हमारे लिए लाभदायक साबित होगा।

 


Spread the love
  • 11
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    11
    Shares