परमात्मा के साथ संबंध

परमात्मा के साथ संबंध

 

 

 


परमात्मा के साथ रिश्ता पुराना हैं, जिसे राजयोग के द्वारा पुनः जागृत किया जाता हैं, जैसे जैसे अध्ययन एवं योगाभ्यास मे प्रगति होगी आप पाएगे कि आपका रिश्ता विकसित हो रहा हैं एवं गहराता जा रहा है ।

प्यार एवं पहचान के आधार पर रिश्ते विकसित होते हैं एक मनुष्य आत्मा, परमात्मा के साथ अपना रिश्ता विकसित करके अपनी उच्च स्तरीय आदिकालीन पवित्रता, शान्ति, आनंद एवं प्रेम पुन: प्राप्त कर सकता हैं।

 

 


अनेक धर्म ऐसा मानते हैं कि ईश्वर ने कहा है कि “मुझे याद करो मैं जैसे हूँ ” जब आप किसी को जानते हैं तो गलत संचय पैदा नहीं होता । जब आप ईश्वर से प्रेम करते हैं तब आपको मालूम रहता है कि ईश्वर में कुछ नकारात्मक नहीं है ईश्वर के साथ रिश्ते के आभाव में एवं ईश्वरीय सत्ता की जानकारी के आभाव में हमारी सुरक्षा एवं हमारा मार्गदर्शन करने वाला कोई नहीं हैं। ऐसी स्थिति मे नकारात्मकता आत्मा को अपने प्रभाव में ले सकती हैं एवं हानि पहुंचा सकती हैं ।

 

 


परमात्मा के बारे में अनेक धारणाएं प्रचलित है जिससे लोग परमात्मा से दूर हो गये हैं इससे आध्यात्मिकता एवं मूल्यों को काफी हानि उठानी पड़ी हैं उदाहरण के लिए लोग ईश्वर से डरते हैं क्योंकि वे ईश्वर को एक नियंत्रक एवं दंडात्मक सत्ता के रूप में देखते हैं । मूल्यों के स्रोत के रूप में,ईश्वर ,किसी व्यक्ति, वस्तु अथवा परिस्थिति को नियंत्रण में लेने की चेष्टा नहीं करते हैं ।

 

 


परमात्मा के साथ अपने रिश्तो की गहराई का चिंतन करना अत्याधिक लाभदायक हो सकता हैं ।

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