आत्मा को जन्म -मरण प्राप्त योग

आत्मा को जन्म -मरण प्राप्त योग

 

 

 

जातस्य हि घ्रवु मृत्यु र्घ्रुवं जन्म मृतस्य च।

तस्मादपरिहार्येर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि ।।
               (गीता अ -2, श्लोक -27)

 

 

 

 


अतिथि गृह में अतिथि सदा नहीं रहता। वह अपना काम पूरा कर अतिथि गृह को छोड़ कर दूसरे स्थान पर चला जाता हैं। कई शहर , गांवो में संचार करता हैं और उनको छोड़कर चला जाता हैं।
इसी प्रकार शरीर आत्मा के लिए अतिथि गृह हैं। अपना काम पूरा होने के बाद शरीर को छोड़ कर जहां ऋण, तथा कर्म संबंध होगा वहाँ जन्म लेती हैं ।

 

 

 

जन्म -मरण के चक्कर से आत्मा मुक्त नहीं हो सकती, क्योंकि आत्मा शाश्वत, अमर, अनादि, अविनाशी हैं, इस लिए गीता में कहा गया है कि “निवारण न करने वाले विषय पर तुम शोक मत करो “

प्राय लोग जन्म-मरण को समझाने के लिए अनेक दृष्टान्तों का प्रयोग करते हैं उनमें से एक दृष्टान्त यह हैं कि – देह एक पक्षी का घोंसला हैं। घोंसले मे पक्षी रहते हैं ,कभी-कभी पक्षी घोंसला छोड़कर उड़ जाते हैं कहीं जंगल में दुसरे जंगल में प्रवेश करते हैं, ये घोंसले दूसरो के आक्रमण से या प्रकृति प्रकोप से नष्ट हो जाते हैं ठीक इसी प्रकार देह दुर्घटना या रोग या बुढापे से नष्ट हो जाते हैं तब देह में रहने वाली आत्मा पक्षी की तरह देह को छोड़कर चली जाती हैं। जहां कर्म संबंध हैं वहाँ जाकर पुनः जन्म लेती हैं।

 

 

 

 

जिस प्रकार दिन-रात का चक्र हैं, सप्ताह का चक्र हैं बारह मास का चक्र हैं उसी प्रकार सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, कलयुग का चक्र हैं। इस चक्र में भी आत्मा पुन: पुन: प्रवेश कर अपने अविनाशी पात्र को अविनाशी रूप में पूरा करती हैं।

चाहे धर्म आत्मा के पूर्वजन्म को माने या न माने लेकिन विज्ञान जो कहता हैं वह इस नबनागरिकता में प्रमुख हैं। अमेरिका, इंग्लैंड,आदि देशों में ईसाई प्रवृति के लोग रहते हैं जो बाइबिल को मानते हैं जो पुर्नजन्म पर विश्वास करते हैं।

 

 

 

अमेरिका के वर्जीनिया विश्वविद्यालय में Dr. E. W. A. N. stewansan नाम के मनोवैज्ञानिक ने पुनर्जन्म के बारे में विश्व भ्रमण कर अपने लेख मे लिखा कि पुनर्जन्म होता हैं। विश्व के अनेक स्थानों पर शोध हुए सब ने माना कि पुनर्जन्म होता हैं।

डा बैनर्जी, डा जमुना प्रसाद, डा सतवन्त पास्रीचा जैसे अनेको मनोवैज्ञानिक ने पुनर्जन्म को स्वीकार किया हैं।

आत्मा को मृत्यु के बाद जन्म लेनाैऔर जन्म के बाद मृत्यु पुनः पुनः पाना शाश्वत हैं।

जन्मे हुए का मरण निश्चित हैं मरे हुए का जन्म निश्चित हैं। इस लिए निवारण न होने वाले विषय के बारे में तुम्हें दुखी नहीं होना चाहिए।

 

 

 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •