रक्षाबंधन- बहनें भाइयों को बंधन क्यों बांधती  है?

रक्षाबंधन- बहनें भाइयों को बंधन क्यों बांधती  है?

 

 



 

रक्षाबंधन, रक्षा और बंधन, दो शब्दों से बना हुआ है। भारत में विशेष तौर पर रक्षाबंधन चारो ओर बड़े प्यार से मनाते हैं। आज हम देख रहे हैं कि रक्षाबंधन सिर्फ देश तक ही सीमित नहीं है। विदेशों में भी इसको धूमधाम से मनाते हैं, जबकि वहाँ का कल्चर और उनकी मान्यतायें अलग हैं। तो रक्षा सिर्फ भाई और बहन के बीच का सम्बंध नहीं है कि बहन भाई को रक्षासूत्र बांधे और भाई उनकी रक्षा करे।पर रक्षाबंधन का व्यापक और सूक्ष्म सम्बंध पशिता के साथ है। पति तन की, मन की, संकल्पों की, व्यवहार की, वाणी की हो तो व्यक्ति कुछ हद तक इस बंधन के साथ बंधा हुआ है। और सुरक्षित है। 

बहनें भाइयों को बंधन क्यों बांधती है?

 

दुनिया में एक कहावत है कि जब कोई । विपत्ति आती है तो । रक्षार्थ हम किसी को । बुलाते हैं। अब ये रक्षाबंधन का पर्व ज्यादातर इस कहावत के साथ जुड़ता है कि बहन भाई को अगर राखी बांधती है तो वो समय आने पर उसकी रक्षा करेगा,लेकिन यहां असमंजस की स्थिति ये है। 

कि यहाँ बहन बड़ी और भाई छोटा भी हो सकता है। अब आप बताओ कि छोटा  भाई  बड़ी बहन के ऊपर आई विपत्ति से उसको का कैसे कर सकता है! है ना सोचने का विषय! तो इसका पूरा सम्बंध आध्यात्मिकता से ही है कि परमपिता परमात्मा के पवित्रता के सम्बंध को एक रिश्ते के साथ जोड़ा जाता है, वो है भाई और बहन का रिश्ता, जो रक्तसम्बंधी हैं, और के माता-पिता के संतान हैं। लेकिन आज की दयनीय स्थिति क्या कहीं ये बयां करती है? आज इतनी विकृति है इस दुनिया में कि किसी की  भी वृत्ति किसी के लिए भी खराब हो । जाती है। ऐसे में कौन किसपर विश्वास  करे, कौन किसकी रक्षा करे! सब भक्षक हो गये, कोई रक्षक नहीं रहा। आज कोई बहन अपने घर में भी सुरक्षित नहीं है

 



 

तब भला हमें सुरक्षा कौन दे? तो ऐसे में । एक परमपिता ही है जो परम रक्षक है, परम पवित्र है और वो हमारी रक्षा भी। पवित्रता का कंगन बांध के करता है। अर्थात् जब हम पवित्र सोच के साथ, पवित्र दृष्टि-वृत्ति के साथ आगे बढ़ते हैं। 

तो स्वयं ही हम अपनी रक्षा कर लेते हैं। ये है इस त्योहार का परमात्मा के साथ गहरा सम्बंध इसलिए एकमात्र सहारा है। परमात्मा, जो हर विपत्तियों से, बुराइयों  से, विकारों से, पवित्रता के आधार से हमारी रक्षा करता और कर सकता है।




 

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