हनुमान जी ने दिखाया सीना फाड़कर by light of spiritual

हनुमान जी ने दिखाया सीना फाड़कर

 

 


एक कथा हैं कि हनुमान जी ने सीना फाड़कर दिखा दिया था कि उनके ह्रदय में भगवान का वास हैं माना भगवान ह्रदय में सदैव विराजमान हैं

जो लोग सदा परमात्मा की स्मृति में रहकर ईश्वरीय सेवा में सदा रहते हैं वही लोग आज हनुमान का प्रतीक हैं जो मेहनत करके, तन, मन, धन से ईश्वरीय सेवा में करके परमात्मा (शिव) को प्रत्यक्ष करते हैं सिद्ध करते हैं कि सदा परमात्मा (शिव) मेरे दिल तख्त पर विराजमान हैं सदा शिव ही शिव की सेवा, हर समय हर कर्म, हर वोल परमात्मा मय हो जाए । जहाँ देखू वहा परमात्मा, जब सोचू तब परमात्मा के बारे में सोचू, तब ह्रदय में परमात्मा का वास होगा

 

 


जो चीज मानव ह्रदय में बस जाती हैं फिर सब जगह वही दिखाई पड़ती हैं जैसे किसी के मन मे डर बैठ जाए तो वह हर चीज से डरता हैं सब जगह भय दिखाई देता हैं कोई आवाज हो, आहट तो भय लगता हैं

जब कोई व्यक्ति खो जाता हैं तो उसके सगें संबंधी दिल से याद करते हैं सब जगह वह दिखायी देता है किसी को देखकर लगता हैं कि वही है और उसको पाने की चेष्टा करते हैं

 

 


मृगतृष्णा जैसे दिल मे पानी की याद है तो हवा, धूप में भी पानी ही दिखता हैं उसको पाने के लिए दौड़ते है

उसी प्रकार यदि परमात्मा (शिव) की याद हमारे अंतरमन में ह्रदय में बस जाए तो हमारा स्नेह, प्यार, लगन, अगन, याद में मगन इतना तीब्र हो जाता हैं कि हमारे चेतन, अवचेतन मन मे परमात्मा ही परमात्मा दिखाई देता है हमारे द्वारा अन्य व्यक्तियों को भी परमात्मा के दर्शन होगें तथा वे ह्रदय से हमें दुआए देगें

 

 


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