षण्मुखी-मुद्रा:- विधि, लाभ, सावधानीं

षण्मुखी-मुद्राः- (सात द्वार बंद करना)

 


विधि

♦यदि संभव हो तो सिद्ध योनी आसन में बैठें।

♦सिर व रीढ़ की हड्डी सीधी रखें।

♥आंखे बंद करके हाथ घुटनो पर रखें ।

♥पूरे शरीर को आराम दें।

♦हाथों को इंगित करने वाली कोहनी के साथ चेहरे के सामने लाएं ।

♦अंगूठे के साथ कान बंद करें, तर्जनी के साथ आंखे, मध्यमा अंगुली से नाक बंद करे ऊपरी होंठ को अनामिका से बंद करें एवं मुँह को कनिष्ठिका से बंद करें।

♦षण्मुखी-मुद्राः- (सात द्वार बंद करना)मध्यमा अंगुली के दबाव को छोड़ दे। गहराई से सांस लें।

♦अंत:श्वसन के अंत में मध्यमा अंगुली से नाक को बंद करें।

♦जितना हो सके सांस रोके रखे।

♦अनाहत चक्र में हो रही ध्वनि को सुनने का प्रयास करें ।

♦कुछ समय बाद, मध्यमा अंगुली के दबाव को छोड़ कर सांस छोड़ दे

♦यह एक दौर पूरा हुआ।

♦एक और दौर शुरू करने के लिए तुरंत सांस लें।

♦इस तरह 5 से 6 बार करें।

♦अभ्यास समाप्त करने के लिए, हाथ को घुटनों पर रखें।आंखे बंद हो, दिमांग को बाहरी जगत से दूर रखने का प्रयास करें।

समय

पहले 5 से 7 मिनट तक करे कुछ दिन बाद 30 मिनट तक अभ्यास करें।

जागरूकता

♦बिन्दु, अनाहत चक्र का प्रयोग एकाग्रता के लिए किया जा सकता हैं।

♦सुबह अभ्यास करना लाभकारी होता हैं। इस अभ्यास से मानसिक संवेदना जागरूक होती हैं।

सावधानी

अवसाद से पीड़ित व्यक्ति न करें।

लाभ





शारीरिक रूप से, हाथों और अंगुलियों से ऊर्जा और गर्मी चेहरे की नसों और मांसपेशियों को उत्तेजित करती हैं। और आराम करती हैं। शारीरिक रूप से, यह अभ्यास आंख, नाक गले के संक्रमण के उपचार करने के लिए करते हैं, मानसिक रूप से आंतरिक व बाहरी जागरूकता को संतुलन करता हैं,आध्यात्मिक रूप से यह प्रत्याहार की स्थिति या भावना को प्रेरित करता हैं।

अभ्यास पर ध्यान दें

सूक्ष्म आवाजें तुरंत सुनने की कोशिश न करें,शुरू में कुछ सुनाई न भी दें, इसमे कुछ सप्ताह तक का समय लग सकता हैं।

ध्यान दें

षण्मुखी शब्द में “षण का अर्थ हैं सात ” , “मुखी का अर्थ हैं मुँह”
इस मुद्रा में सात दरवाजे बंद करके जागरूकता को पुननिर्देशित करना शामिल हैं।




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