राजयोग ध्यानाभ्यास का विस्तार वर्णन

राजयोग ध्यानाभ्यास का विस्तार वर्णन




राजयोग भारत की सबसे प्राचीन ध्यानाभ्यास पद्धति हैं। राजयोग एक स्वस्थ एवं मूल्यनिष्ठ जीवनशैली हैं। योग शब्द के बहुत से अर्थ होते हैं जिनमें से प्रमुख हैं नियंत्रण करना, जोड़ना या एक होना। राजयोग के अभ्यास से एक स्पष्ट आध्यात्मिक अन्तर्हष्टि विकसित होती हैं। जो आत्म-अनुसंधान करने में अत्यंत सहायक होती हैं। राजयोग से हमारे अंदर सुषुप्तवस्था मे विद्यमान शक्ति विकसित होकर हमारा चरित्रबल बन जाती हैं। राजयोग से जीवन में नयी सोच एवं नयी गतिविधियों का प्रारंभ होता हैं।
इस ध्यानाभ्यास की कुछ पद्धतियां ,आध्यात्मिकता के लिए कुछ पद्धतियां चेतना की जागृति के लिए और कुछ पद्धतियां धार्मिक शिक्षाओं को मिश्रित करके करायी जाती हैं। संवेदनहीनता ,भय एवं तंन्द्रवस्था के कारण आत्मा की चेतना में आये संकुचन समाप्त करके आत्म जागृति करने की प्रक्रिया ही राजयोग हैं। राजयोग से आंतरिक शांति एवं अपारशक्ति प्राप्त होती हैं। राजयोग से जीवन का अनुभव होता हैं।

राजयोग ध्यानाभ्यास सिखने के लिए कुुुछ छमहत्वपूर्ण पक्ष हैं जिससे जीवन में नयी दिशा प्राप्त होती हैं।

यथार्थ- आत्म जागृति के लिए राजयोग ध्यानाभ्यास




सांसारिक जीवन में पारिवारिक एवं आर्थिक पृष्ठभूमि, स्थान तथा पद के आधार पर ही व्यक्ति की पहचान पद्धति प्रचलित हैं। कुछ लोग अपने सत्य स्वरूप को जानने समझते हैं। शारीरिक स्मृति के आधार पर ही बनी पहचान आत्मा की सम्पूर्ण पहचान नहीं हैं। ध्यानाभ्यास हमारी चेतना में गहरी जड़ जमाए हुए मिथ्या पहचान के मानकों को जानने, समझने और इन्हें दूर करने कि एक मात्र विधि हैं। यदि आप पवित्र चेतना को महत्व देते हैं तो राजयोग की एक मात्र रास्ता हैं। ध्यानाभ्यास का कुछ समझ तक अभ्यास करने के बाद आप स्वयं अनुभव करेगें कि आपके अंदर गहरें विश्वास का निर्माण हुआ हैं, और आपकी चेतना में जागृति हुयी हैं।

यथार्थ चिंतन के लिए राजयोग ध्यानाभ्यास




सोचना और सकल्प करना हर मनुष्य के स्वभाव हैं। परंतु विचारों की और संकल्पों की गुणवत्ता क्या हैं। राजयोग से विचारों की गुणवत्ता बेहतर बनाने में और दिशा को नियंत्रित करने में सहायता मिलती हैं। ध्यानाभ्यास के द्वारा आप देह तथा पदार्थ मे सदा आश्रय स्थल की खोज, भटकने वाले मन को सही रास्ते पर ला सकते हैं। योग्य अनुभव नहीं होने के कारण मन व्यर्थ, व्यक्ति तथा पदार्थ में शांति और प्रेम की खोज में सदा भटकता रहता है़, ध्यानाभ्यास से मन को सही दिशा मिलती हैं।

मनन-चिंतन के लिए राजयोग ध्यानाभ्यास




दुर्भाग्य से मावन जीवन में घटित होने वाली प्रत्येक घटना को समझता है और उसको असफलता के रूप में ले लेता हैं ध्यानाभ्यास ये किसी घटना या कार्य को गहराई से समझने में सहायता मिलती हैं। किसी घटना के बारे में मनन-चिंतन करने से निरिक्षण करने की क्षमता बढ़ती हैं,सुनिश्चित परिणाम प्राप्त होता हैं।

प्रत्यक्षीकरण के लिए राजयोग ध्यानाभ्यास




यदि अपने मानसपटल पर एक शांतिपूर्ण दृश्य को बनाकर इस पर साक्षी होकर ध्यान केन्द्रित करते हैं। तो आपके अन्तर्मन में शांति और संतुष्टता की शक्तिशाली भावना उत्पन होती हैं। भावनाओं का प्रवाह अन्तर्मन से बाह्य जगत की और प्रवाहित होता हैं। जिससे आपको बाह्य जगत में शांति को खोजने की जरूरत नहीं हैं। वर्तमान समय में व्यक्ति मीडिया के तीव्र प्रभाव में आकर मानसिक एकाग्रता एवं शांति को भूल गया हैं, राजयोग ही ऐसा माध्यम हैं जिसके द्वारा इन्हें पुन: प्राप्त कर सकते हैं।

मौन के लिए राजयोग ध्यानाभ्यास




मनुष्य की चेतना को जागृत करने के लिए मौन सबसे प्रभावशाली क्षेत्र हैं। मौन के माध्यम से विचारों एवं संकल्पों की गति शून्य हो जाती हैं। सकारात्मक चिंतन करने के माध्यम से ही व्यक्ति चेतना की गहन शांति के अंदरूनी जगत की अनुभव यात्रा कर सकता हैं। यदि आप एकबार शांति के इस अंदरूनी जगत की यात्रा करने में सफल हो गये तो आपको एक अनूठा अनुभव होता हैं। सब कुछ सकारात्मक दिखता हैं। मानव सारी व्याधि, तनाव, दु:ख को भूल जाता हैं। केवल शांति का अनुभव करता हैं।

सृजनशीलता के लिए राजयोग ध्यानाभ्यास





सामान्य रूप से सभी आत्माओं मे सृजनशीलता की शक्ति होती हैं। राजयोग के समय धैर्यपूर्वक मनन-चिंतन करने से धैर्य की शक्ति तथा उदार हृदय के बारे में ध्यानाभ्यास करने से उदारता की भावना का विकास होता हैं। जब व्यक्ति के जीवन में शांति समाप्त हो जाती हैं। तो संघर्ष बढ़ने लगता हैं। तब वह ध्यानाभ्यास सीखने के लिए मानसिक रूप से तैयार होता हैं। ध्यानाभ्यास के माध्यम से व्यक्ति अपने लिए सृजन पथ का चयन करता हैं।

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