कर्म योग क्या हैं

कर्म योग

 

 

 


कर्म एक संस्कृत भाषा का शब्द है इसका मतलब है कार्रवाई या कार्य ।

शारीरिक या मानसिक कार्रवाई कर्म है सोच मानसिक कर्म है, वर्तमान जीवन और पिछले जन्मों में कर्म हमारे कर्मो का कुल योग हैं।

कर्म का मतलब न केवल कार्रवाई हैं, बल्कि एक कार्रवाई की परिणाम भी है कर्म में एक छिपी हुई शक्ति या क्रिया है जो मनुष्य के लिए कर्मो के फल लाता हैं

एक कार्रवाई का परिणाम वास्तव में एक अलग बात नहीं है यह कार्रवाई का एक हिस्सा हैं और इसे विभाजित नहीं किया जा सकता हैं ।

गीता का केन्द्रीय शिक्षण काम के लिए अनुलग्नक नहीं है श्वास, खाने, देखने, सुनने, सोचने, आदि सब कर्म है सोच असली कर्म है पसंद नापसंद असली कर्म का गठन करते हैं

मनुष्य प्रकृति में तीन गुना ज्यादा है इसमें इच्छा, ज्ञान और क्रिया शामिल हैं
इक्छा वह हर चीज की कर रहा है, ज्ञान जान रहा है क्रिया करने को तैयार हैं

कार्रवाई के पीछे इक्छा और विचार हैं दिमाग में एक वस्तु की इक्छा उत्पन होती हैं इक्छा, विचार और कार्य हमेशा एक साथ होते हैं

इक्छा कर्म पैदा करती हैं आप अपनी इक्छा की वस्तुओं को प्राप्त करने के लिए काम करते हैं कर्म के फल को दर्द या खुशी के रूप में पैदा करते हैं
जन्म के बाद आपको अपने कर्म के फल काटने के लिए जन्म लेना होगा । यह कर्म का नियम हैं ।

पहले जो विकर्म किए हैं उनको मिटाने के लिए परमात्मा की याद में रहना होगा और भविष्य में कोई विकर्म नहीं करना होगा

परमात्मा की याद में रहने से पिछले विकर्मो का नाश होगा
परमात्मा स्वंय कहते हैं कि कर्म करो फल की इक्छा नहीं करो

 

 


क्या कभी परमात्मा ने ये कहा है कि विकर्म करो ,फल की इक्छा नहीं करो ,नहीं कहा न ।

कर्म और विकर्म में बहुत अंतर है
जितना हम प्यारे और न्यारे रहेंगे उतना ही कमल के फूल की तरह खिलेगे ।
कमल के फूल की तरह ही क्यों?
क्योंकि कमल का फूल कीचड़ में खिलता है और कीचड़ का उसपर कोई असर नहीं पड़ता ।
उसी प्रकार हम किसी भी माहौल में रहें उसका असर हम पर नहीं होगा क्योंकि हम परमात्मा की याद में हैं
मन, वचन, कर्म से शांति, आनन्द, पवित्रता की खुशी बाटना है
जिससे जन्म -जन्म सफल होगें

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